ये सॉफ्टवेयर क्या होता है ?

हार्डवेयर के बारे में तो आप काफी पढ़ चुके हैं.आज थोड़ी चर्चा सॉफ्टवेयर की कर लें.

सॉफ्टवेयर

जैसा हम पहले पढ़ चुके हैं कि ‘सॉफ्टवेयर’ उन प्रोग्रामों को कहा जाता है, जिनको हम हार्डवेयर पर चलाते हैं.किसी भी कम्प्यूटर को चलाने के लिये जो सबसे आवश्यक सॉफ्टवेयर है वह है ऑपरेटिंग सिस्टम. ऑपरेटिंग सिस्टम के बिना आप कम्प्यूटर में काम नहीं कर सकते.

ऑपरेटिंग सिस्टम

ऑपरेटिंग सिस्टम व्यवस्थित रूप से जमे हुए साफ्टवेयर का समूह है जो कि आंकडो एवं निर्देश के संचरण को नियंत्रित करता है. आपरेटिंग सिस्टम हार्डवेयर एवं साफ्टवेयर के बीच सेतु का कार्य करता है.कम्प्यूटर का अपने आप में कोई अस्तित्व नही है.यह केवल हार्डवेयर जैसे की-बोर्ड, मॉनिटर, सी.पी.यू इत्यादि का समूह है. आपरेटिंग सिस्टम समस्त हार्डवेयर के बीच सम्बंध स्थापित करता है.आपरेटिंग सिस्टम के कारण ही प्रयोगकर्ता को कम्प्यूटर के विभिन्न भागों की जानकारी रखने की आवश्यकता नहीं पड़ती है.साथ ही प्रयोगकर्ता अपने सभी कार्य तनाव रहित होकर कर सकता है.यह सिस्टम के संसाधनों को बांटता एवं व्यवस्थित करता है. ऑपरेटिंग सिस्टम के कई अन्य उपयोगी विभाग होते है जिनके कई काम केन्द्रिय प्रोसेसर द्वारा किए जाते है. उदाहरण के लिए आप प्रिटिंग का कोई काम करें तो केन्द्रिय प्रोसेसर आवश्यक आदेश देकर वह कार्य आपरेटिंग सिस्टम पर छोड देता है और वह स्वयं अगला कार्य करने लगता है. इसके अतिरिक्त फाइल को पुनः नाम देना, डायरेक्टरी की विषय सूची बदलना, डायरेक्टरी बदलना आदि कार्य आपरेटिंग सिस्टम के द्वारा किए जाते है.

आज जो सबसे प्रचलित ऑपरेटिंग सिस्टम हैं वह माइक्रोसॉफ्ट कंपनी द्वारा बनाये गये हैं. इनमें डॉस (DOS), विंडोज-98, विंडोज-एक्स पी, विंडोज-विस्टा प्रमुख हैं.लेकिन इन सभी को कम्प्यूटर के साथ आपको खरीदना पड़ता है. यदि आप मुफ्त का ऑपरेटिंग सिस्टम प्रयोग करना चाहते हैं तो उसके लिये लिनक्स के कई ऑपरेटिंग सिस्टम हैं जो पूरी तरह मुफ्त हैं. इनमे से कई विंडोज से कई मायने में बेहतर भी हैं लेकिन इनको सीखने में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है. चुंकि अभी विंडोज ही बहु-प्रचलित ऑपरेटिंग सिस्टम है इसलिये हम उसी से संबंधित उदाहरणों का प्रयोग इस लेख में करेंगे.

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर : एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर आपके रोज मर्रा की जरूरत को पूरा करते हैं. जैसे यदि आप यदि कुछ लिखना चाहें तो उसके लिये विंडोज में नोटपैड व वर्डपैड है. इसके अलावा आप ओपन ऑफिस का प्रयोग कर सकते हैं जो मुफ्त है या माइक्रोसोफ़्ट ऑफिस खरीद सकते हैं जिसमें से आप माइक्रोसॉफ्ट वर्ड का उपयोग लिखने के लिये कर सकते हैं. इसके अलावा आप डाटा के गणितीय,सांख्यिकीय उपयोग के लिये माइक्रोसॉफ्ट एक्सल और प्रजेंटेशन बनाने के लिये पावर पॉइंन्ट का उपयोग कर सकते हैं.किसी भी प्रकार की ड्राइग के लिये विंडोज में पेन्ट नाम का सॉफ्टवेयर होता है यदि आपको एडवांस ड्राइंग करनी है तो आप गिम्प (GIMP) का प्रयोग कर सकते हैं जो कि मुफ्त है या फिर अडोब कंपनी का फोटोशॉप सॉफ्टवेयर खरीद सकते हैं.

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स्टोरेज डिवाइस (संचय युक्ति)

आप पढ़ चुके हैं कि रैम (RAM) एक कार्यकारी मैमोरी है यानि यह तभी काम करती है जब आप कम्प्यूटर पर काम कर रहे होते हैं. कम्प्यूटर के बन्द करने पर रैम में संग्रहित सभी सूचनाऐं नष्ट हो जाती हैं.लेकिन आप चाहेंगे कि आप कम्प्यूटर पर जो काम करें वह बाद में आपको मिल सके.इसके तरह के कामों के लिये और प्रोसेस्ड जानकारी को सहेज कर रखने के लिये स्टोरेज डिवाइस का उपयोग किया जाता है ताकि आवश्यकता पड़ने पर उसी सूचना का पुन: उपयोग किया जा सके या वह जानकारी एक जगह से दूसरी जगह पहुंचायी जा सके.कम्प्यूटर द्वारा स्थायी तौर पर बहुत अधिक मात्रा मे आंकडों को संचित करने के लिये कई तरह की स्टोरेज डिवाइस का उपयोग होता है.जैसे हार्ड डिस्क,फ्लॉपी डिस्क, सीडी,डीवीडी,पैन ड्राइव आदि.

हार्ड डिस्क़ ड्राइव : यह कम्प्यूटर से जुड़ी स्टोरेज डिवाइस (संचय युक्ति) है. यह इलेक्ट्रो-मैगनैटिक सिद्धांत पर काम करती है. इसका उपयोग किसी भी जानकारी,फोटो,संगीत या फिल्म को स्थायी रूप से संग्रहित करने के लिये होता है. आप किसी हार्ड-डिस्क में कितनी जानकारी सहेज सकते हैं इसका पता हार्ड-डिस्क की क्षमता (Capacity) पर निर्भर करता है. आजकल सामान्यत: हार्ड डिस्क की क्षमता को जी.बी. (गीगा-बाइट) में मापा जाता है.हमारे काम में आने वाले हार्ड-डिस्क 20 जीबी से 200 जीबी तक की होती हैं. 

सीडी/डीवीडी : यह ऑप्टीकल सिद्धांत पर काम करती हैं.जहाँ सामान्यत: हार्ड डिस्क कम्प्यूटर से जुड़ी रहती है वहीं सीडी/डीवीडी को आप निकालकर एक जगह से दूसरे जगह तक ले जा सकते हैं.कम्प्यूटर में सीडी/डीवीडी में रखी जानकारी को पढ़ने के लिये सीडी/डीवीडी ड्राइव का होना आवश्यक है. किसी फिल्म या संगीत की सीडी/डीवीडी को आप अपने सीडी/डीवीडी प्लेयर में भी पढ़ सकते हैं बशर्ते सीडी/डीवीडी में रखी फिल्म या संगीत का फॉर्मेट आपके सीडी/डीवीडी प्लेयर के अनुकूल हो.यदि आप सीडी/डीवीडी में कोई जानकारी सहेजना चाहते हैं तो आपके कम्प्यूटर में सीडी/डीवीडी राइटर होना जरूरी है.

यू.पी.एस. : कम्प्यूटर को काम करने के लिये बिजली की आवश्यकता होती है. लेकिन आमतौर पर हमारे घरों में जो बिजली आती है उसमें बहुत से उतार चढाव (फ्ल्क्चुएशन) होते हैं जो कम्प्यूटर को खराब कर सकते हैं. साथ ही यदि आप कम्प्यूटर में काम कर रही हैं और बिजली चले जाये और कम्प्यूटर बन्द हो जाये तो आपके द्वारा किया गया काम नष्ट हो सकता है और इस तरह कम्प्यूटर के खराब होने का खतरा भी बना रहता है. इसी से बचने के लिये एक डिवाइस आती है जिसे यू.पी.एस. कहते हैं. यू.पी.एस. यानि अनइंटरप्टेड पावर सप्लाई. इसमें एक बैटरी होती है जो बिजली से चार्ज होती रहती है और बिजली के जाने के बाद कम्प्यूटर को थोड़े देर चलाये रहती है ताकि आप अपना काम सहेज कर कम्प्यूटर को नॉर्मल शट डाउन कर सकें.

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मेरे कल के लेख में दो टिप्पणीयां आयी जिन्होंने महत्वपूर्ण जानकारी दी. सिरिल जी ने बताया

क्रियेटिव के स्पीकर तो अच्छे व सस्ते हैं, पर सर्विस रद्दी है. इस बार मैंने उससे खरीदे तो रिप्लेसमेंट के लिये बड़ा परेशान किया. दोबारा खराब हुये तो मैंने कूड़े में ही फेंक दिये.

नोन-ओप्टीकल माउस तो अब ढूंढ़ना ही मुश्किल है. आप्टिकल नेहरू प्लेस में तो 125 रु में भी मिल जाता है. इस बार मैंने आइ-बाल का लेज़र माउस खरीदा. ये काफी अच्छा है. मुझे 435 रु का पड़ा. इसका मूवमेंट बड़ा स्मूद और तेज़ है.

लोकेश जी ने बताया

आप कम से कम Dual core प्रोसेसर, 2 जीबी रैम, Intex का रिमोट वाला 5+1 होम थियेटर, 17 इंच TFT मॉनीटर, BSNL के किसी Home Plan वाले ब्रॉडबैण्ड वाले कनेक्शन को, टाईप II मॉडेम के साथ, लीजिये। Home Plan वाले ब्रॉडबैण्ड में स्पीड 2 एमबी तक मिल सकती है! जबकि Unlimited प्लान में 256/ 512 केबीपीएस से अधिक प्रदान ही नहीं की जाती!! टाईप II मॉडेम से आप अधिकतम 3 मशीन चला सकते हैं, एक वायरलेस द्वारा (जैसे लैपटॉप), एक USB द्वारा, एक LAN द्वारा। कोशिश कीजिये, मुख्य मशीन को LAN से चलाने की, क्योंकि USB में कई बार ‘हैंग’ होने की शिकायतें यदा-कदा मिली हैं।

इतनी महत्वपूर्ण जानकारियों के लिये आपका धन्यवाद.

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