कैसे चुने सही मदरबोर्ड -2

पिछ्ले लेख में मैने मदरबोर्ड चुनने से पहले कुछ सावधानियों के बारे में बताया था. आज उसी चर्चा को आगे बढ़ाते हैं.

मदरबोर्ड चुनने से पहले यह भी निर्धारित करें कि आप अपने कम्प्यूटर पर कौन सा ऑपरेटिंग सिस्टम (ओ.एस.) डालना चाहते हैं.यह सुनिश्चित लर लें कि आप जो भी ओ.एस. डालना चाहते हैं उसमें आपके मदरबोर्ड,चिपसैट तथा कार्ड के ड्राइवर मौजूद हैं कि नहीं. जैसे कई बार नई टैक्नोलॉजी के मदरबोर्ड के ड्राइवर लिनक्स समर्थित नहीं होते तो यदि आप लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग करना चाहते हैं तो इस प्रकार के मदरबोर्ड को खरीदने से आप परेशानी में पड़ सकते हैं.

मदरबोर्ड में जो सबसे प्रमुख चीज होती है वह है चिपसैट. मदरबोर्ड का यही वह हिस्सा है जो मदरबोर्ड की क्षमता घटाता या बढ़ाता है. यह भी विभिन्न कंपनियों द्वारा बनाये जाते हैं. जैसे सिस (SiS), वाया(Via), एनवीडिया (nVedia), इन्टैल (Intel) आदि. खरीदते समय दुकानदार से यह पूछ लें कि जो चिपसैट आप ले रहे हैं वह मदरबोर्ड में समर्थित है या नहीं. अक्सर होता है कि नयी तकनीक के मदरबोर्ड पुराने चिपसैट के अनुरूप नहीं होते. तो यदि आप मदरबोर्ड लेने से पहले उसके निर्माता की वैबसाइट से जांच लें कि फलां चिपसैट समर्थित है कि नहीं तो आप बाद की परेशानियों से बच सकते हैं.

motherboard आजकल ऑन-बोर्ड कम्पोनेन्ट्स का चलन बढ़ गया है. इसका अर्थ है कि आजकल अधिकतर कार्ड जैसे साउंड कार्ड, नैटवर्क़ कार्ड आदि मदरबोर्ड के साथ लगे हुए ही आते हैं. पहले सारे कार्ड अलग अलग खरीदने पड़ते थे. इससे दामों में तो कमी हुई है लेकिन कई बार एक कार्ड के खराब होने पर पूरा मदरबोर्ड बदलना भी पड़ जाता है. हांलाकि आजकल बजार में मिलने वाले मदरबोर्ड काफी विश्वसनीय है और जल्दी खराब नहीं होते लेकिन जैसा मैने पहले कहा कि यह बिल्कुल खराब नहीं होंगे ऐसा नहीं कहा जा सकता.ऑनबोर्ड कार्ड्स के साथ कभी कभी यह परेशानी आती है कि यह वैसी क्षमता वाले नहीं होते जैसे कि अलग से लिये गये कार्ड्स होते हैं. तो यदि आप अपने कम्प्यूटर पर अच्छा वीडियो देखना चाहते हैं या उस पर उच्च गुणवत्ता का संगीत सुनना चाहते हैं तो बेहतर है कि आप ऑनबोर्ड कार्ड्स ना लेकर सारे हिस्से अलग अलग लें. 

मदरबोर्ड से लेने से पहले यह देख लें कि आप की वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति के बाद उसमें अपग्रेड के लिये कितनी जगह खाली है. विशेषकर एक्स्टैंसन स्लौट देखें ताकि आपको यदि अपने कम्प्यूटर की रैम बढ़ानी हो या कोई नया कार्ड लगाना हो,जैसे टी.वी.ट्यूनर कार्ड, तो आपके पास कितने स्लौट खाली है.

मदरबोर्ड आप बार बार नहीं बदल सकते.यह आपके कम्प्यूटर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसलिये जब भी मदरबोर्ड खरीदें सोच समझ कर खरीदें. खरीदने से पूर्व विक्रेताओं से बात करें. इंटरनैट पर मदरबोर्ड निर्माताओं की साइट पर स्पेशीफिकेशन देखें. यह भी ढूंढें कि कहीं किसी विशेष मदरबोर्ड पर प्रयोक्ताओं को कोई समस्या तो नहीं आ रही.लेकिन कभी कभी यह फायदे का सौदा भी हो जाता है. आप कहेंगे कैसे? चलिये मैं आपको अपने साथ हुई एक घटना बताता हूँ.

कोई 8-9 साल पुरानी बात है. तब विंडोज-98 (Windows-98) नया नया आया था. तकरीबन उसी समय लिनक्स (linux) जो मुक्त व मुफ्त ऑपरेटिंग सिस्टम है वह भी आया था. मैं अपने संस्थान के लिये एक कम्प्यूटर खरीदने की सोच रहा था जिसमें लिनक्स लोड कर देख सकूँ. उसी समय मुझे पता चला कि एक विशेष कंपनी का मदरबोर्ड और चिपसैट विंडोज-98 में समस्या पैदा कर रहा है लेकिन उस पर लिनक्स चल सकती है.यह भी पता चला कि उस कंपनी ने उस मॉडल के मदरबोर्ड वापस मंगा लिये हैं या उन्हे बहुत सस्ते में बेचने का निर्णय किया है. मैने उस मॉडल के बारे में पता किया तो एक विक्रेता के पास उपलब्ध था. उस समय उसका वास्तविक मूल्य कोई 21 हजार रुपया था लेकिन इस समस्या के कारण मुझे वह करीब नौ हजार में मिल गया. खरीदते समय विक्रेता ने कहा कि यदि कोई सोफ्टवेयर लोड करने में समस्या आई तो हमारी कोई जिम्मेवारी नहीं होगी ना ही हम इसे बदलेंगे. मैं उसका आशय समझ रहा था और वह समझ रहा था कि एक अच्छा मुर्गा फंसा जो कुछ दिनों में दूसरा मदरबोर्ड लेने उसके पास आयेगा. मैने वह मदरबोर्ड ले लिया. उस पर लिनक्स लोड की जो कई वर्षों तक उस मशीन में चलती रही.

मदरबोर्ड से संबंधित आपके कोई प्रश्न हों तो टिप्पणीयों से पूछें.

कैसे बनें सशक्त ब्लॉगर:विलारा के उपयोग से-2

विंडोज लाइव राइटर (विलारा Windows Live Writer) के कुछ उपयोगों के बारे में आपको इस लेख के पहले भाग में बता चुका हूँ. आइये अब आगे चलें. यदि आप विलारा के बारे में नहीं जानते तो पहले यह पढ़ें.

अपने लेख में बड़ी आसानी से वीडियो जोड़ें

insert-video-from-webआम ब्लॉगर को अक्सर यह समस्या आती है कि वह यू-ट्यूब या गूगल वीडियो में रखे किसी वीडियो को अपने लेख में चिपकाना चाहता है. यू-ट्यूब या गूगल वीडियो किसी भी विडियो चिपकाने (embed) के लिये आपको एक कोड देता है. उस कोड को सीधे कॉपी करके विलारा की स्क्रीन में चिपका दें. इसके लिये आपको एच.टी.एम.एल व्यू में जाने की भी जरूरत नहीं है. जैसे ही आप कोड को चिपकायेंगे विलारा यू-ट्यूब या गूगल का वीडियो आपकी स्क्रीन में ले आयेगा ( यदि आप नैट से जुड़े हैं तो). आप चाहें तो insert—> video में जाकर भी अपना कोड चिपका सकते हैं जैसा चित्र में दिखाया गया है.  यदि आप माइक्रोसॉफ़्ट का सोप बॉक्स प्रयोग करते हैं insert—> video में एक ऑप्शन होता है Insert from soap box. इस ऑप्शन पर जायें. अपनी विंडोज लाइव आई.डी और पासवर्ड डालें. अब आप अपने सोप बॉक्स के वीडियो को भी अपने लेख में डाल सकते हैं. तो है ना कमाल कीinsert-video-from-soapbox चीज.   

केवल चिपकायें नहीं ठीक से चिपकायें.

अक्सर आप अपने लेख में कोई सामग्री डालते हैं जो या तो आप सीधे वेब से कॉपी करके चिपकाते हैं या फिर किसी माइक्रोसॉफ्ट वर्ड की फाइल से कॉपी करके चिपकाते हैं. इस तरीके से चिपकाने के लिये आप  (Ctrl+V) का उपयोग करते हैं. इस तरह से चिपकाने से आपके फॉंट , लिंक या अन्य किसी भी प्रकार की फॉर्मेटिंग भी आपके लेख में आ जाती है. यदि आप इससे बचना चाहते हैं तो विलारा में एक ऑप्शन है "Paste Special" जो कि माइक्रोसोफ़्ट ऑफिस (Microsoft Office)की तरह ही है.Paste Special (Ctrl+Shift+V)  का प्रयोग करके आप कॉपी करने वाली सामग्री की फॉर्मेटिंग हटा सकते हैं. यदि आप चाहते हैं कि paste-specialफोंट की फॉर्मेटिंग वही रहे लेकिन अन्य एच.टी.एल. हट जाये तो इसके लिये Paste Special (Ctrl+Shift+V) के बाद Thinned HTML वाला ऑप्शन चुनें. जैसा चित्र में दिखाया गया है.

वर्ड-प्रेस में टैग,कैटेगरी व पोस्ट स्लग जोड़ें

यदि आपका ब्लॉग वर्ड-प्रेस में है तो आप अपने लेख की श्रेणी , पोस्ट स्लग ऑफलाइन भी बदल सकते हैं. यदि आप अपने लेख में टैग लगाना चाहें या अपनी पोस्ट को प्रकाशित करने का समय बदलना चाहें तो आप यह भी विलारा के द्वारा कर सकते हैं.  insert-categories-and-postslugइसके लिये View—> Properties में जायें या F2 दबायें. आपके लेख के नीचे चित्र की तरह की एक स्क्रीन खुलेगी जिसमें आप ऊपर बताये गये ऑप्शन भर सकते हैं.

विलारा को और उपयोगी बनायें.

अपने विलारा को आप अपने काम के हिसाब से और भी उपयोगी बना सकते हैं. इसके लिये बहुत से प्लग-इन आते हैं जिन्हे आप यहां से प्राप्त कर सकते हैं. इन प्लग-इन्स की सहायता से आप कई उपयोगी फीचर विलारा में जोड़ सकते हैं. अगले अंक में हम कुछ उपयोगी प्लग-इन्स की चर्चा करेंगे.

यदि आपकी कोई तकनीकी समस्या है तो टिप्पणी छोड़ें.

दुनिया में एक अरब कम्प्यूटर

इस समय दुनिया में एक अरब से ज्यादा कम्प्यूटर हैं और सन 2014 तक इनकी संख्या दुगनी होने की संभावना है.सोमवार को यह आंकड़ा प्रस्तुत किया गार्टनर रिसर्च ने जो कि सूचना तकनीक के शोध में एक अग्रणी संस्था है.

गार्टनर के अनुसार, कम्प्यूटरों की संख्या करीब 12 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से बढ़ रही है और इस दर से 2014 तक 2 अरब कम्प्यूटर पूरी दुनिया में होंगे.यह वृद्धि विकासोन्मुख उभरते हुए देशों में ज्यादा है. अगले एक अरब नये कम्प्यूटरों में 70 प्रतिशत की वृद्धि इन देशों से ही आने की संभावना है. अभी 58 प्रतिशत कम्प्यूटर बड़े देशों जैसे अमेरिका , यूरोप के बड़े देश और जापान के लोगों के पास हैं. लेकिन इन देशों का प्रतिशत धीरे धीरे कम हो रहा है. गार्टनर के अनुसार कम्प्यूटरों की घटती कीमत और इंटरनैट सेवाओं का विस्तार इसके दो प्रमुख कारक हैं.

इस साल करीब 18 करोड़ कम्प्यूटर यानि कि कोई 16  प्रतिशत रिटायर भी हो जायेंगे. इन कम्प्यूटरों के साथ एक चिंता भी जुड़ी हुई है. गार्टनर के मुख्य शोध प्रबन्धक माइक एस्केरिच के अनुसार इन 18 करोड़ कम्प्यूटरों में से करीब 3.5 करोड़ कम्प्यूटर इस तरह से फैंक दिये जायेंगे जिससे की मानव स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है. कम्प्यूटरों के निष्पादन से पूर्व उससे निकलने वाले हानिकारक पदार्थों के बारे सोचना आवश्यक है. एस्केरिच के अनुसार यह खतरा विकाशशील देशों में ज्यादा है क्योंकि बड़े देश अपने पुराने कम्प्यूटरों को विकाशसील देशों में भेज देते हैं जहां उनको रिसायकल किया जाता है. इस प्रक्रिया में इससे निकलने वाले हानिकारक पदार्थों द्वारा मानवीय स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव की पूर्ण अनदेखी की जाती है.