दुनिया में एक अरब कम्प्यूटर
इस समय दुनिया में एक अरब से ज्यादा कम्प्यूटर हैं और सन 2014 तक इनकी संख्या दुगनी होने की संभावना है.सोमवार को यह आंकड़ा प्रस्तुत किया गार्टनर रिसर्च ने जो कि सूचना तकनीक के शोध में एक अग्रणी संस्था है.
गार्टनर के अनुसार, कम्प्यूटरों की संख्या करीब 12 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से बढ़ रही है और इस दर से 2014 तक 2 अरब कम्प्यूटर पूरी दुनिया में होंगे.यह वृद्धि विकासोन्मुख उभरते हुए देशों में ज्यादा है. अगले एक अरब नये कम्प्यूटरों में 70 प्रतिशत की वृद्धि इन देशों से ही आने की संभावना है. अभी 58 प्रतिशत कम्प्यूटर बड़े देशों जैसे अमेरिका , यूरोप के बड़े देश और जापान के लोगों के पास हैं. लेकिन इन देशों का प्रतिशत धीरे धीरे कम हो रहा है. गार्टनर के अनुसार कम्प्यूटरों की घटती कीमत और इंटरनैट सेवाओं का विस्तार इसके दो प्रमुख कारक हैं.
इस साल करीब 18 करोड़ कम्प्यूटर यानि कि कोई 16 प्रतिशत रिटायर भी हो जायेंगे. इन कम्प्यूटरों के साथ एक चिंता भी जुड़ी हुई है. गार्टनर के मुख्य शोध प्रबन्धक माइक एस्केरिच के अनुसार इन 18 करोड़ कम्प्यूटरों में से करीब 3.5 करोड़ कम्प्यूटर इस तरह से फैंक दिये जायेंगे जिससे की मानव स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है. कम्प्यूटरों के निष्पादन से पूर्व उससे निकलने वाले हानिकारक पदार्थों के बारे सोचना आवश्यक है. एस्केरिच के अनुसार यह खतरा विकाशशील देशों में ज्यादा है क्योंकि बड़े देश अपने पुराने कम्प्यूटरों को विकाशसील देशों में भेज देते हैं जहां उनको रिसायकल किया जाता है. इस प्रक्रिया में इससे निकलने वाले हानिकारक पदार्थों द्वारा मानवीय स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव की पूर्ण अनदेखी की जाती है.
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अच्छी जानकारी दी.चिंतन भी स्वभाविक है. रीसायकलिंग पर कार्य आवश्यक है इस वक्त.
कमल भाई, आपने एक जरूरी रिपोर्ट हम तक पहुंचाई है। इस क्षेत्र में अगली सदी एशिया और दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका की होगी, ऐसी कामना है।