विंडोज लाइव राइटर: चिट्ठाकारों के लिये वरदान

आप ब्लॉगिंग करने के लिये अपनी पोस्ट कैसे लिखते हैं? यदि यह प्रश्न आप से किया जाय तो आप क्या जबाब देंगे.शायद आपका जबाब कुछ ऐसा होगा.

यदि आपके कम्प्यूटर में हिन्दी चलती है तो.

1. आप अपने वर्डप्रेस या ब्लॉगर के अकाउंट के अन्दर निर्मित एडिटर पर सीधे लिखते हैं और बीच बीच में उसे ड्राफ्ट में सहेजते रहते हैं.

2. आप पहले से नोटपैड,वर्डपैड या माइक्रोसॉफ्ट वर्ड पर अपनी पोस्ट लिख के रखते हैं और फिर उसे कॉपी करके वर्डप्रेस या ब्लॉगर के एडीटर पर पेस्ट कर देते हैं.

यदि आप किसी ऑनलाइन हिन्दी एडीटर का प्रयोग करते हैं जैसे तो आप पहले उस साइट पर जाकर हिन्दी लिखते हैं और फिर अपने ब्लॉग के एडिटर में पेस्ट कर देते हैं.

इसमें आपको क्या क्या परेशानियां होती है.

1. यदि अपनी पोस्ट में चित्र या वीडियो लगाना चाहें तो आपको परेशानी होती है.

2. आपका चित्र या वीडियो सही जगह पर नहीं लगता.

3. आपको अपने चित्र को छोटा-बड़ा (रिसाइज) करने के लिये अलग से किसी सॉफ्टवेयर का प्रयोग करना पड़ता है.

4. आप चाहते हैं कि आप ऑफलाइन अपनी पोस्ट लिख कर रख लें और फिर जब इंटरनैट कनेक्शन हो तो उसे अपने ब्लॉग पर पोस्ट कर दें.

5. जब आपके पास नैट कनेक्शन ना हो तब भी आप चाहते हैं कि आप अपनी पुरानी पोस्ट्स को पढ़ सकें.

6. आप अपनी किसी पोस्ट का प्रिंट आउट लेना चाहते हैं लेकिन उसके लिये आपको अपने ब्लॉग पर जाके कॉपी-पेस्ट करना पड़ता है.

7. आप पब्लिश करने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आपकी पोस्ट आपके ब्लॉग पर ठीक ठीक दिखे.

यदि आप ऊपर लिखी समस्याओं से दो चार होते हैं तो उसका समाधान है विंडोज लाइव राइटर.इसकी सहायता से आप अपनी पोस्ट आराम से ऑफलाइन लिख सकते हैं और नैट कनेक्शन मिलने पर उसे पोस्ट कर सकते हैं.

खूबियां

विंडोज लाइव राइटर में बहुत सी खूबियां हैं जैसे WYSIWYG (What You See Is What You Get अर्थात जैसा देखो वैसा पाओ) एडिटर,आसान फोटो-पब्लिशिंग, वीडियो लगाने की सुविधा, श्रेणियाँ (Tagging), HTML मोड में पूर्वालोकन (Preview), “Web Layout” मोड में लिखने से आप को लगता है कि जैसे आप अपने ही ब्लॉग में लिख रहे हों. यानि आपको लिखते हुए पोस्ट जैसी दिखाई देगी, पब्लिश होने पर ठीक वैसी ही होगी. इसके अलावा इसमें नये फीचर जोड़ने के लिये प्लगइन भी जोड़े जा सकते हैं.यदि आपका ब्लॉग वर्डप्रेस में है तो आप इसमें पोस्ट स्लग भी लगा सकते हैं. इससे आप अपने लेख का प्रिंट भी ले सकते हैं. इसका इंटरफेस बिल्कुल माइक्रोसॉफ्ट वर्ड की तरह है तो इसको सीखने में ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ती.  

डाउनलोड व स्थापना

1. सबसे पहले विंडोज लाइव राइटर को यहां से डाउनलोड कर लें. (साईज 2.28 एम बी)

2. यह WLInstaller.exe फाइल डाउनलोड करेगा. अभी इसका वर्जन है 12.0.1366.1026.

3. फिर नीचे दिये गये चित्रों की सहायता से इसे अपने कम्प्यूटर पर स्थापित करें.ध्यान रहे कि आपका इंटरनैट कनेक्शन चल रहा हो.

य़ह पहली स्क्रीन है.

यहां पर आपको केवल Accept पर क्लिक करना है.

WLW-install-1
WLW-install-2 यहाँ पर आपके पास तीन ऑप्शन आयेंगे. आप चाहें तो उन पर क्लिक करें.

यदि आप इनका मतलब नहीं जानते तो इनके बक्से को खाली रहने दें और यदि पहले से यह बक्सा भरा हो तो उसे खाली कर दें.

अब यह लाइव राइटर को डाउनलोड करेगा.

नीचे कुछ अन्य सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने का ऑप्शन है. आप चाहें तो इनको क्लिक कर दें.
यदि आप इनका मतलब नहीं जानते तो इनके बक्से को खाली रहने दें और यदि पहले से यह बक्सा भरा हो तो उसे खाली कर दें.

WLW-install-3
WLW-install-4 तो लाइव राइटर आपकी मशीन में स्थापित हो गया.

 

अपने ब्लॉग को लाइव राइटर में कैसे स्थापित करें

अपने ब्लॉग को लाइव राइटर में स्थापित करने के लिये नीचे दिये गये चित्रों का प्रयोग करें.

WLW-blogsetup-1

संभवत: आपका अपना कोई ब्लॉग ब्लोगस्पॉट या वर्डप्रेस पर होगा. तो आप दूसरा वाल ऑप्शन चुनें.

यदि आपका ब्लॉग ब्लोगस्पॉट या वर्डप्रेस पर है तो तीसरा वाला ऑप्शन चुनें.

WLW-blogsetup-2
WLW-blogsetup-3

अपने ब्लॉग का नाम, यूजरनेम और पासवर्ड डालें.

यदि आप ऑफिस से ब्लॉगिंग करते हैं और आप किसे प्रॉक्सी सर्वर के द्वारा नैट तक पहुचते हैं तो Edit proxy Settings में जाकर अपने प्रोक्सी सर्वर का विवरण डालें. WLW-blogsetup-4
WLW-blogsetup-5

अब लाइव राइटर आपके ब्लॉग से आपकी थीम की जानकारी और अन्य जानकारी डाउनलोड करेगा.

अपने ब्लॉग का नाम डालें जिससे आप अपने ब्लॉग को लाइव राइटर में पहचानना चाहते हैं.

(लाइव राइटर में आप एक से अधिक ब्लोग़्स को भी स्थापित कर सकते हैं)

WLW-blogsetup-6
WLW-blogsetup-7

यदि आप अपने ब्लॉग की कोई सैटिंग बदलना चाहें तो एडिट सैटिंग में जाकर बदल सकते हैं.

WLW-blogsetup-post

 

तो लो जी लाइव राइटर हो गया आपके कम्प्यूटर में स्थापित. अब आराम से इसमें पोस्ट लिखें.

 

 

किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या के लिये टिप्पणी छोड़ें.

कम्प्यूटर के विभिन्न भाग

कम्प्यूटर के मुख्यत: दो हिस्से होते हैं. computer-hardware

1. हार्डवेयर (Hardware) 

2. सॉफ्टवेयर (Software)

हार्डवेयर : कम्प्यूटर के भौतिक हिस्से जिन्हे हम देख या छू सकते हैं वो हार्डवेयर कहलाते हैं. ये भाग मशीनी (मैकेनिकल),इलेक्ट्रीकल (electrical) या इलेक्ट्रोनिक (electronic) हो सकते हैं. हर कम्प्यूटर का हार्डवेयर अलग अलग हो सकता है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि कम्प्यूटर किस उद्देश्य के लिये प्रयोग में लाया जा रहा है और व्यक्ति की आवश्यकता क्या है. एक कम्प्यूटर में विभिन्न तरह के हार्डवेयर होते है जिनमें मुख्य हैं.सी.पी.यू. (CPU), हार्ड डिस्क (Hard Disk) , रैम (RAM), प्रोसेसर (Processor) , मॉनीटर (Monitor) , मदर बोर्ड (Mother Board) ,फ्लॉपी ड्राइव आदि. इनकी हम विस्तार से चर्चा आगे करेंगें. कम्प्यूटर के केबल, पावर सप्लाई युनिट,की बोर्ड (Keyboard) , माउस (Mouse) आदि भी हार्डवेयर के अंतर्गत आते हैं. की बोर्ड , माउस , मॉनीटर , माइक्रोफोन , प्रिंटर आदि को कभी कभी पेरिफेरल्स (Peripherals) भी कहा जाता है.

सॉफ्टवेयर : कम्प्यूटर हमारी तरह हिन्दी या अंग्रेजी भाषा नहीं समझता.हम कम्प्यूटर को जो निर्देश देते हैं उसकी एक नियत भाषा होती है. इसे मशीन लैंग्वेज या मशीन की भाषा कहा जाता है. इसी मशीन की भाषा में दिये जाने वाले निर्देशों को प्रोग्राम (Program) कहते हैं. ‘सॉफ्टवेयर’ उन प्रोग्रामों को कहा जाता है, जिनको हम हार्डवेयर पर चलाते हैं और जिनके द्वारा हमारे सारे काम कराए जाते हैं बिना सॉफ्टवेयर के कम्प्यूटर से कोई भी काम करा पाना असंभव है.

मुख्यत: सॉफ्टवेयर दो प्रकार के होते हैं ।

1. सिस्टम सॉफ्टवेयर

“सिस्टम सॉफ्टवेयर” ऐसे प्रोग्रामों को कहा जाता है, जिनका काम सिस्टम अर्थात कम्प्यूटर को चलाना तथा उसे काम करने लायक बनाए रखना है.सिस्टम सॉफ्टवेयर की सहायता से ही हार्डवेयर अपना निर्धारित काम करता है. ऑपरेटिंग सिस्टम, कम्पाइलर आदि सिस्टम सॉफ्यवेयर के मुख्य भाग हैं ।

2. एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर

“एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर” ऐसे प्रोग्रामों को कहा जाता है, जो हमारे रोजमर्रा के कामों को कम्प्यूटर में अधिक तेजी और सरलता से करने में मदद करते हैं.आवश्यकतानुसार भिन्न-भिन्न उपयोगों के लिए भिन्न-भिन्न एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर होते हैं. जैसे लिखने के लिये, आंकड़े रखने के लिये, गाना रिकॉर्ड करने के लिये, वेतन की गणना, लेन-देन का हिसाब, वस्तुओं का स्टाक आदि रखने के लिये लिखे गए प्रोग्राम ही एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर हैं.

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